jija sali chudai तो लगी शर्त-2

Share this story

(jija sali chudai To Lagi Shart-2)

“jija sali chudai” बिना सोचे समझे बोल पड़ी- तो ठीक है लगी शर्त !

जीजा तो जैसे तैयार ही बैठा था, मेरी बांह पकड़ कर बोला- तो चलो, तुम्हारी चीखें निकलवाते हैं।

जीजा के मुँह से यह सुनते ही जैसे मैं स्वप्न से जागी, मैं तो शर्म के मारे लाल हो गई थी। मेरी तो समझ में ही नहीं आया कि क्या करूँ ! “jija sali chudai”

पर फिर भी मैंने हिम्मत दिखाई और बोली- जीजा समय आने दो, देख लेंगे तुम्हें भी कि कितनी चीखें निकलवा सकते हो?और मैं हँस कर वहाँ से भाग गई। जीजा और मेरे बीच का संवाद आगे क्या रंग दिखा सकता है यह तो मैंने सोचा ही नहीं था पर रात को जीजा ने सुमन को जैसे चोदा था उसको देख कर तो दिल किया कि एक बार जीजा मेरी चूत में भी ठोक दे अपना किल्ला।

उसके बाद जीजा से उस दिन दो बार आमना सामना हुआ, जीजा ने पूछ ही लिया आखिर शर्त क्या होगी?

मैं दोनों बार शरमा गई, कुछ बोल ही नहीं पाई।

जब जीजा सुमन को लेकर विदा होने लगे तो गाड़ी के पास जीजा ने फिर से पूछा तो मैंने भी कह दिया- अगर तुमने मेरी चीखें निकलवा दी तो सारी उम्र तुम्हारी बन कर रहूँगी। जीजा खुश हो गए और शगुन में मुझे चांदी की अंगूठी देकर विदा हो गए।

सुमन की विदाई के बाद मैं भी विदा होकर अपने पतिदेव के साथ अपने ससुराल आ गई।

ससुराल आने के बाद अब हर रात जब भी मेरे पति मुझे चोदते तो एकदम से जीजा की याद आ जाती।

कुछ दिन ऐसे ही बीत गए। अब पति देव भी अपनी नौकरी में ज्यादा व्यस्त हो गए। पहले तो महीने में एक-दो बार वो बाहर रहते थे पर अब तो वो हफ्ते में भी एक-दो दिन बाहर रह जाते थे। मुझे अब अकेलापन महसूस होने लगा था। इस अकेलेपन में मुझे पति के साथ-साथ अब जीजा की भी याद सताने लगी थी। बार बार उनका वो सुमन को रगड़-रगड़ कर चोदना आँखों के सामने फिल्म की तरह घूमने लगता था। “jija sali chudai”

चूत की खुजली जब मिटाए ना मिटे तो फिर जीजा भी पति से ज्यादा प्यारा लगने लगता है और पतिदेव के पास तो चूत की खुजली मिटाने का समय ही नहीं था तो क्या करती, फ़िदा हो गई जीजा के लण्ड पर और चूत भी चुलबुलाने लगी जीजा का लण्ड लेने को।

पर जीजा से मिला कैसे जाए। अब तो पतिदेव के गैर हाज़री में मैं बस यही सोचती रहती। कहते है सच्ची लगन से अगर मांगो तो भगवान भी मिल जाते हैं। बस एक दिन जीजा हमारे घर पर आये। उन्हें जयपुर में कुछ काम था। उनको तीन चार दिन रुकना था। मेरी जब जीजा से आँख मिली तो जीजा ने आँख मार दी। मेरे दिल में हलचल सी मच गई थी। पति देव और जीजा बैठ कर बातें कर रहे थे और मैं खाना बना रही थी।

जीजा ने बताया की उन्होंने होटल में कमरा बुक करवा लिया है !

तो मेरे पति बहुत नाराज हुए, बोले- घर के होते हुए होटल में रहो तो हमारे यहाँ होने का क्या फायदा?

और उन्होंने जीजा को घर पर रहने के लिए मना लिया। मेरी तो बाँछें खिल उठी जीजा जो रहने वाले थे तीन चार दिन मेरे पास।

रात को काफी देर तक बातें होती रही और फिर मैं जीजा का बिस्तर लगा कर कमरे में अपने पति के पास सो गई। सच कहूँ तो दिल नहीं था पति के पास सोने का, जीजा का लण्ड दिमाग में घूम रहा था। “jija sali chudai”

सुबह होते ही मैं नाश्ता बनाने लगी। तभी मेरे लिए एक खुशखबरी आई, पति देव को अचानक टूर पर जाना पड़ गया था। मेरे तो दिल की धड़कन सिर्फ यह खबर सुन कर ही बढ़ गई थी।

पति जब जाने लगे तो जीजा बोला- शालू अकेली है तो मेरा यहाँ रहना ठीक नहीं है तो मैं भी होटल में चला जाता हूँ।

पर इन्होंने जीजा को बोल दिया- चाहे कुछ भी हो, आपको घर पर ही रहना है। और फिर अब तो और भी ज्यादा जरूरी है क्यूंकि शालू अकेली है। “jija sali chudai”

खैर जीजा मान गए तो मेरी जान में जान आई। यह कहानी आप chudaai.xyz पर पढ़ रहे हैं।

ये अपना सामन लेकर करीब दस बजे घर से चलने लगे तो जीजा भी इनके साथ ही चले गए अपने काम से।

सबके जाने के बाद मैं नहा धोकर तैयार हो गई और सोचने लगी कि जीजा ने तो अब तक कुछ भी ऐसा नहीं जताया है कि वो मुझ से सेक्स करना चाहते हैं तो मैं क्यों इतनी उतावली हो रही हूँ उनसे चुदवाने को।

पर दिल तो कर रहा था ना जीजा से चुदवाने का।

मैं सोचने लगी कि कैसे जीजा के साथ चुदाई का मज़ा लिया जाए। इसी उधेड़बुन में दोपहर हो गई। तभी जीजा का फोन आया कि वो कुछ देर में घर पर आ रहे हैं तो मैं उठ कर उनके लिए खाना बनाने लगी।

जब तक खाना तैयार हुआ तब तक जीजा भी आ गए।

बाहर गर्मी बहुत थी तो वो नहा कर केवल बनियान और लुंगी में खाने की मेज पर आ गए। मैं उनको खाना परोसने लगी तो मैंने देखा की जीजा की नजर मुझ पर जमी हुई थी। “jija sali chudai”

मैं आपको बता दूँ की मैंने उस दिन कपड़े भी खुले-खुले से पहने थे जो जीजा को उतेजित करने के लिए ही थे।

मेरे बड़े गले के ब्लाउज में से मेरी चूचियाँ जो कि सभी कहते हैं कि क़यामत हैं, झांक रही थी। मैं खाना परोस रही थी और जीजा अपनी आँखें सेक रहे थे।

हम दोनों ने एक साथ बैठ कर खाना खाया। खाने के दौरान कोई खास बात नहीं हुई। खाना खत्म होने के बाद जीजा अंदर कमरे में लेट गए। रसोई का काम निपटा कर मैं जानबूझ कर जीजा के पास कमरे में गई और पूछा- जीजा कुछ और चाहिए क्या…?

जीजा तो जैसे इसी सवाल को सुनने के लिए तैयार बैठे थे, बोले- हाँ… चाहिए तो पर… !!

जीजा ने अपनी बात को अधूरा छोड़ दिया। तभी जीजा ने बात को बदलते हुए एकदम से मुझे शर्त की याद दिलाई। पर मैं तो भूली ही नहीं थी वो बात। फिर भी मैंने ऊपर के मन से कहा की जीजा ऐसी बातें तो शादी-बियाह में होती रहती हैं। “jija sali chudai”

“पर हम तो जब एक बार शर्त लगा लें तो पूरी करके ही छोड़ते हैं।” जीजा ने अपना इरादा स्पष्ट कर दिया।

मैं उठ कर बाहर जाने लगी तो जीजा ने मेरा हाथ पकड़ लिया। मेरा पूरा बदन झनझना गया। आखिर चाहती तो मैं भी यही थी। पर मैं हाथ छुड़वा कर अपने कमरे में भाग गई। मेरी सांसें तेज तेज चल रही थी अब। तभी जीजा मेरे कमरे के बाहर आये और मुझे दरवाजा खोलने को कहने लगे और बोले- शर्त लगाती हो और पूरा भी नहीं करती? यह तो गलत बात है। हम भी तो देखे की हमारी साली चुदाई में चिल्लाती है या नहीं?

“नहीं जीजा, यह ठीक नहीं है…!” सच कहूँ तो मेरे दिल में यही भी था कि मैं अपने पति के साथ कैसे धोखा कर सकती हूँ पर एक बार जीजा से चुदवाने के लिए चूत भी फड़क रही थी।जीजा कुछ देर दरवाजे पर खड़े खड़े मुझे मानते रहे पर मैंने दरवाजा नहीं खोला। कुछ देर बाद जब जीजा जाने लगे तो मैं अपने दिल पर काबू नहीं रख पाई और मैंने दरवाजा खोल दिया। मेरे दरवाजा खोलते ही जीजा एकदम खुश हो गए। “jija sali chudai”

मैं दरवाजा खोल कर एक तरफ़ खड़ी हो गई, जीजा कमरे में अंदर आये और मेरे चेहरे को ऊपर उठा कर बोले- शालू… सच में तुम एक क़यामत हो। जब से तुम्हें देखा है, मेरा लण्ड बस तुम्हारी याद में ही सर उठाये खड़ा रहता है। बस एक बार अपनी खूबसूरती का रसपान करने दो।

मेरी तो जैसे आवाज ही बंद हो गई थी। तभी जीजा ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए तो दिल धाड़-धाड़ बजने लगा। जीजा ने होंठ चूसते चूसते चूचियाँ मसलनी शुरू कर दी। मेरी तो हालत खराब हो गई थी। पहली बार किसी गैर मर्द का हाथ मेरी जवानी पर था। जीजा ने अपनी बाहों में मुझे उठाया और ले जाकर बिस्तर लेटा दिया।

jija sali chudai

बिस्तर पर लिटा कर जीजा ने अपनी लुंगी खोल कर एक तरफ़ फैंक दी। जीजा का लण्ड अंडरवियर में भी बहुत खतरनाक लग रहा था।

फिर जीजा बिस्तर पर आकर मुझ से लिपट गया और मेरे बदन को चूमने लगा। मैं मदहोश होती जा रही थी।

जीजा ने मेरा ब्लाउज खोल दिया और ब्रा में कसी चूचियों को चूमने लगा। फिर जीजा ने मेरा ब्लाउज और ब्रा उतार दी और मेरी चूचियों को मुँह में भर भर कर चूसने लगा। मेरी चूत पानी से सराबोर हो गई और उसमे लण्ड लेने के लिए खुजली होने लगी थी। दिल कर रहा था कि जीजा का लण्ड पकड़ कर घुसा लूँ अपनी चूत में और चुद जाऊँ अपने सपनों के लण्ड महाराज से ! “jija sali chudai”

जीजा ने धीरे धीरे मेरे कपड़े मेरे बदन से अलग कर दिए। अब मैं जीजा के सामने बिल्कुल नंगी पड़ी थी। शर्म के मारे मेरी आँख नहीं खुल रही थी। तभी जीजा ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया तो अहसास हुआ कि जीजा भी बिल्कुल नंगा हो चुका था और जीजा का मूसल जैसा लण्ड सर उठाये खड़ा था।

मैंने भी अब शर्म करना ठीक नहीं समझा और पकड़ लिया जीजा का लण्ड अपने हाथ में और लगी सहलाने।

एक गर्म लोहे की छड़ जैसा लण्ड था जीजा का। हाथ में पकड़ कर ही महसूस हो रहा था कि यह मेरी चीखें निकलवा देगा।

मुझे लगने लगा था कि आज तो मैं शर्त हारने वाली हूँ पर मैं तो चाहती ही यही थी कि जीजा मेरी चीखें निकलवाए।

वैसे मेरे पति का लण्ड भी कुछ कम नहीं था पर वो तो मुझे समय ही नहीं दे पाते थे। जब भी मुझे उनके लण्ड की जरूरत होती तो वो टूर पर गए होते थे और मैं अकेली चूत में उंगली डाल कर उनको याद करती रहती।

जीजा ने मेरे पास आकर लण्ड को मेरे मुँह के पास कर दिया। मैंने आज से पहले कभी भी लण्ड मुँह में नहीं लिया था। पर जीजा ने लण्ड मेरे मुँह से लगा दिया तो मैंने जीभ से चख कर देखा। उसका नमकीन सा स्वाद मुझे अच्छा लगा तो मैंने लण्ड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। जीजा का मूसल सा लण्ड गले तक जा रहा था। “jija sali chudai”

जीजा मस्ती में उसको अंदर धकेल रहे थे। कई बार तो वो मुझे अपने गले में फंसता हुआ महसूस हुआ। पहली बार था तो उबकाई सी आने लगी। जीजा ने मेरी हालत देखी तो लण्ड बाहर निकाल लिया।

जीजा ने अब मुझे लेटाया और मेरी चूत के आस पास जीभ से चाटने लगे। मैं आनन्द-सागर में गोते लगाने लगी। तभी जीजा की जीभ मेरी चूत के दाने को सहलाते हुए चूत में घुस गई।

मैं तो सिहर उठी।

पहली बार चूत पर जीभ का एहसास सचमुच बहुत मजेदार था। पति देव ने ना तो कभी मेरी चूत चाटी थी और ना ही कभी अपना लण्ड चुसवाया था। ये दोनों ही नए अनुभव थे मेरे लिए। “jija sali chudai”

बहुत मज़ा आ रहा था और मैं मस्ती के मारे आह्हह्ह उह्ह्ह्ह म्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह ओह्ह्ह्ह कर रही थी।

जीजा ने अपना लण्ड मेरे हाथ में दे दिया था और मैं उस लोहे जैसे लण्ड को अपने हाथ से मसल रही थी।

तभी जीजा बोला- अब चीखने के लिए तैयार हो जाओ।

मैं कुछ बोल नहीं पाई बस जवाब में थोड़ा मुस्कुरा दी। अब तो मेरी चूत भी लण्ड मांग रही थी।

जीजा मेरी टांगों के बीच में आ गया और अपना मोटा लण्ड मेरी चूत पर घिसने लगा।मेरी चूत पानी पानी हो रही थी, डर भी लग रहा था, मैं सोच में ही थी कि जीजा अब क्या करेगा?

मेरी चीखें निकलवाने के लिए की जीजा ने लण्ड को चूत पर टिका कर एक जोरदार धक्का लगा दिया और लण्ड चूत को लगभग चीरता हुआ अंदर घुसता चला गया और मेरे मुँह से एक जोरदार चीख निकल गई।

अभी पहले धक्के का दर्द खत्म भी नहीं हुआ था कि जीजा ने दो तीन धक्के एक साथ लगा दिए और मैं दर्द से दोहरी हो गई। “jija sali chudai”

सच में बहुत खतरनाक लण्ड था जीजा का !

लगभग पूरा लण्ड अब चूत में था बस थोड़ा सा ही बाहर नजर आ रहा था। तभी जीजा ने सुपारे तक लण्ड को बाहर निकाला और फिर एक जोरदार धक्के के साथ वापिस चूत में घुसेड़ दिया। लण्ड अंदर जाकर सीधा बच्चेदानी से टकराया।

मैं मस्ती और दर्द दोनों के मिलेजुले एहसास में चीख उठी। पति का लण्ड था तो मस्त पर बच्चेदानी तक नहीं पहुँच पाया था आज तक। यह एहसास भी मेरे लिए बिल्कुल नया था।

कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद जीजा ने पहले धीरे-धीरे धक्के लगाये और फिर पूरी गति में शुरू हो गया। लण्ड बार बार अंदर बच्चेदानी तक जा रहा था और मैं अपने आप को रोक नहीं पाई चीखने से।

मैं शर्त हार चुकी थी पर इस शर्त को हारने का मुझे अफ़सोस बिल्कुल नहीं था। मैं तो अब खुद ही चाह रही थी कि जीजा जोर जोर से धक्के लगा कर फाड़ डाले मेरी चूत को। सच में बहुत मस्त चुदाई हो रही थी मेरी। इतना सख्त लण्ड पहली बार मेरी चूत में था। “jija sali chudai”

कुछ देर बाद लण्ड ने अपनी जगह चूत में बना ली थी और अब मुझे दर्द नहीं हो रहा था पर मैं अब भी मस्ती के मारे चीख-चिल्ला रही थी,”आह्ह्ह जीजा जोर से… फाड़ दे आज तो… तूने तो मेरी सच में चीखें निकलवा दी मेरे राजा !”

मैं मस्ती के मारे बड़बड़ा रही थी। जीजा चुपचाप अपने काम में लगा था और मेरी चूत का भुरता बना रहा था। जीजा पसीने से तर हो चुका था। दस मिनट हो चुके थे उसको मुझे चोदते हुए। मूसल सा लण्ड और मस्त धक्के खाने के बाद अब मेरी चूत अब उलटी करने वाली थी। और फिर वो ज्यादा देर अपने आप को रोक नहीं पाई और झर झर झड़ने लगी। पानी छुटने से चूत फच फच करने लगी।

जीजा अब भी पूरे जोश के साथ चुदाई कर रहा था। कमरे में मादक आवाजें गूंज रही थी।

पानी निकलने के बाद मेरा बदन कुछ देर के लिए ढीला हुआ था पर जीजा की जोरदार चुदाई ने मुझे एक बार फिर से गर्म कर दिया। और मैं गाण्ड उठा उठा कर लण्ड चूत में लेने लगी। “jija sali chudai”

जीजा ने मुझे अब घोड़ी बनाया और पीछे आ कर लण्ड मेरी चूत में डाल दिया। जीजा का लण्ड इतना सख्त था कि मैं उस पर टंगी हुई सी लग रही थी।

जीजा ने फिर से अपनी पूरी ताकत के साथ मेरी चुदाई शुरू कर दी और फिर पूरे आधा घंटा तक वो मुझे चोदता रहा। मैं दो बार झड़ गई थी इस बीच।

आधे घंटे के बाद जीजा का बदन अकड़ने लगा और उसके धक्कों की गति भी चरम पर थी। तभी जीजा के लण्ड ने गर्म-गर्म माल मेरी चूत में पिचकारी मार कर छोड़ दिया। जीजा का वीर्य की गर्मी से मेरी चूत भी एक बार फिर पानी पानी हो गई थी। जीजा ने ढेर सारा माल मेरी चूत में भर दिया।

मैं इस चुदाई से परमसुख का एहसास कर रही थी। शर्त हार कर भी मैं बहुत कुछ जीत गई थी।

कुछ ही देर बाद जीजा फिर से मेरे पास आ गए और फिर से मेरे बदन को चूमने चाटने लगे। मैं हैरान थी कि अभी अभी यह इंसान आधे घंटे तक चोद कर हटा है और इतनी जल्दी फिर से तैयार हो गया। “jija sali chudai”

मैंने जोर देकर अपनी आँखे खोली तो देखा की जीजा का लण्ड अब फिर शवाब पर आ गया था। मेरी चूत को कपडे से साफ़ करके जीजा ने फिर से अपना लण्ड चूत में घुसा दिया। मैं चीखती रही और जीजा चोदता रहा। फिर तो सारी रात मेरी चीखें कमरे के अंदर गूंजती रही।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी जरूर बताना !
मेरे प्रिय मित्र राज की आईडी तो आपको पता ही होगी फिर भी बता देती हूँ। “jija sali chudai”