train sex story ट्रेन का डर

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(train sex story Train Ka Dar)

train sex story दोस्तो, नमस्ते, कैसे हैं आप लोग?

काफी दिनों से समय न मिलने के कारण आपके सामने न आ सका। माफ़ कीजियेगा दोस्तो !

वैसे झूठी कहानी मुझे लिखनी नहीं आती, मैं जो भी लिखता हूँ वो मेरी वास्ताविक कहानियाँ होती हैं, कुछ दिनों से काम में व्यस्त रहने के कारण कहानी न लिख सका, इस बीच मेरी जीवन में कुछ घटा, वो आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ ! “train sex story”

मेरे ताया जी के लड़के की साली अन्जलि की शादी पटना में हुई है।
वैसे उनकी शादी को डेढ़ साल हो गया है, उसका पति धीरज हमारे शहर में ही काम करता है, उनके घर और हमारे घर अक्सर आना जाता लगा रहता है, वैसे अंजलि 19 साल की है, देखने में स्लिम और खूबसूरत है, बूब्स 34 के हैं खूबसूरत लड़की है।

अंजलि मेरी भी साली ही लगी तो अक्सर मजाक वगैरह चलता रहता था।

कुछ दिनों से वो अपने मायके पटना गई हुई थी।
मुझे ऑफिस के काम से रांची जाना पड़ा, दीपावली के दिन थे, उन दिनों में अक्सर प्रवासी लोग अपने अपने घर जाते हैं और ट्रेनों का तो बुरा हाल होता है, पैर रखने की जगह नहीं होती।
खैर मेरी किस्मत अच्छी थी, उसी दिन एक स्पेशल ट्रेन चली थी, मुझे उसमें सीट मिल गई।

मुझे वहाँ 3 दिन लग गये।
मैंने अपना ऑफिस का काम निपटाया और रात को सोने लगा, रात के 10 बज रहे थे, धीरज बाबू का फ़ोन आया- कैसे हैं हैरी भाई?

मैंने कहा- ठीक हूँ। आप कैसे हैं?

थोड़ी बातें हुई, धीरज भाई ने कहा- हैरी, आज तुम्हारे घर गया था तो मालूम हुआ कि तुम रांची में हो।

मैंने कहा- हाँ !

धीरज ने कहा- वापिस कब आ रहे हो?

मैंने कहा- कल सुबह निकलूंगा।

धीरज भाई ने कहा- यार हैरी, अंजलि पटना में है ! तुम्हें मालूम है ना?

मैंने कहा- हाँ ! क्या हुआ उन्हें?

धीरज ने कहा- हुआ कुछ नहीं, असल में मैं सोच रहा था कि अगर तुम्हें कोई दिकत न हो तो अंजलि को आप अपने साथ ला सकते हो? “train sex story”

मैंने कहा- धीरज भाई, मुझे तो कोई दिकत नहीं है, पर मेरी ट्रेन कल सुबह की है और और जिस ट्रेन से मैं आ रहा हूँ, उसमें तो कोई सीट भी नहीं है, बड़ी मुश्किल से मुझे सीट मिली है, और अब तो वेटिंग भी नहीं मिल सकती। अगर आप पहले कहते तो मैं कोई जुगाड़ करता।

अचानक मुझे वो ट्रेन याद आई जिससे मैं आया था, वो पटना तक ही जाने वाली स्पेशल ट्रेन थी।
मैंने मैंने धीरज को कहा- भाई, रुकिए देखता हूँ, एक स्पेशल ट्रेन चली थी ! शायद उसने जगह होगी, तो काम बन जाएगा। “train sex story”

मैंने अपना लैपटॉप ऑन किया और उस ट्रेन की स्थिति देखने लगा।
उस ट्रेन में तो बहुत तो अभी भी 750 के करीब सीट खाली थी।

मैंने धीरज को फ़ोन किया, कहा- एक स्पेशल ट्रेन है, उसमें सीट खाली है, मैं इन्टरनेट टिकट बुक कर लेता हूँ। मैंने 2 सीट बुक कर ली और धीरज को फ़ोन किया- आप अंजलि को फ़ोन कर दीजिये, कल मैं शाम 5 बजे तक पटना पहुँच जाऊँगा। ट्रेन 6 बजे शाम को है। “train sex story”

मैं शाम को 5.30 बजे पटना पहुँच गया। ट्रेन करीब 2 घंटे लेट थी, मैंने स्टेशन पर उतर कर देखा कि अंजलि और उनके पिता जी स्टेशन पर खड़े थे।

मैंने उनके पिता जी को नमस्ते किया और बातें करने लगा।

अंजलि की उम्र करीब 19 साल की थी, नई-नई शादी हुई थी, मैं तो अंजलि को शादी के पहले से ही जानता था, शादी के पहले अंजलि के साथ बहुत घूमते फिरते थे।

खैर वो समय कुछ और था, बातों बातों में 2 घंटे बीत गया, मालूम ही नहीं लगा, ट्रेन आ गई।

हमारी सीट थर्ड ऐसी में थी।

हम लोग अपनी सीट पर बैठ गए, ट्रेन बिल्कुल खाली थी, ट्रेन में हमारे सिवा बस 2 लोग और थे।

मैंने सोचा कि शायद आगे से लोग आ जायेंगे ट्रेन में !

मैं और अंजलि बातें करने लगे, मजाक करने लगे। रात को करीब 11 बज गए, ट्रेन में कोई नहीं आया। सारी सीटें खाली थी, जो दो लोग बैठे थे, वो भी वहीं दिख रहे थे। “train sex story”

थोड़ी देर बात टीटी आया और टिकट चेक किया, मैंने टीटी से पूछा- सर ट्रेन खाली है, क्या बात है?

टीटी ने कहा- पूरी ट्रेन ही खाली है, हर बोगी में बस 2-4 लोग ही हैं बस।

मैंने कहा- सर, हमें तो डर लग रहा है, और मेरे साथ औरत भी है, कहीं कुछ उल्टा सीधा न हो जाए।

टीटी ने कहा- आप डरिये मत, ऐसा कुछ नहीं होगा।

और वो चला गया, ट्रेन चल रही थी, जैसे जैसे रात हो रही थी, हम डरे जा रहे थे कि कोई चोर लुटेरा न आ जाये और सिर्फ हम दोनों क्या कर सकते हैं।

मैंने अंजलि से कहा- चलो उतर जाते हैं, किसी और ट्रेन से चलेंगे।

ऐसे बातें करते करते फिर से टीटी मुझे जाता दिखा, मैंने टीटी से आग्रह किया- सर, जहाँ ज्यादा लोग हैं, हमें वहाँ बैठा दो, मेरे साथ में औरत है, मुझे डर लग रहा है। “train sex story”

टीटी ने कहा- आओ आपको फस्ट ऐसी में बैठा देता हूँ, आदमी तो उसने भी नहीं है पर उस बोगी में 4 परिवार वाले लोग हैं, वहाँ आप लोग सेफ महसूस करोगे।

टीटी में हमें अपनी सीट पर बैठा दिया और बोला- अब कोई टीटी नहीं आएगा, आप लोग दरवाजा लोक कर लीजिये।

हमने दरवाजा लोक किया थोड़ी जान में जान आई, अंजलि ने कहा- आओ अब खाना खा लेते हैं।

हम लोग खाना खाकर बातें करने लगे।
अंजलि अपने सीट पर लेट गई, अंजलि को तो अभी भी डर लग रहा था, अंजलि ने कहा- हैरी, मुझे ट्रेन का सोच सोच कर अभी भी डर लग रहा है। “train sex story”

मैंने कहा- आ जाओ, मेरे पास सो जाओ।

अंजलि मेरे पास आकर लेट गई, मेरे मन में पहले वाला शैतान जाग गया।

वैसे तो मैं अंजलि से शादी के पहले भी कई बार सेक्स कर चुका था पर अब काफी दिनों बाद यह मौका मिला।

अंजलि मेरे साथ चिपक कर सोने लगी, मैं अंजलि के बूब्स को दबाने लगा, अंजलि कहने लगी- छोड़ो न हैरी, अब ये सब अच्छा नहीं लगता, मेरी शादी हो चुकी है।

मैंने कहा- ऐसे कैसे जाने दूँ यार अंजलि ! इतने दिनों बात तो फिर से भगवान ने फिर से मौका दिया है।

और पुरानी बातें याद करने लगे, धीरे धीरे मैं अंजलि की चूचियाँ दबाने लगा।

अंजलि सिसकारियाँ लेने लगी और जोश में आने लगी।

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मैंने अंजलि के बलाउज के बटन खोल दिए और उसकी गोरी गोरी चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा।
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अंजलि सीईइ आअह्ह आह्ह करने लगी और मेरे ऊपर आकर मेरे अपने चूचियों को अच्छे से मेरे मुँह में डाल कर चुसवाने लगी ! “train sex story”

मैं और अंजलि पूरे जोश में थे और ट्रेन भी पूरा तेजी में चल रही थी।

मैंने अंजलि की साड़ी ऊपर किया और उसके पैन्टी के ऊपर से उसके चूतड़ मसलने लगा।
और अंजलि ऊपर से ही अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ रही थी।

अंजलि पूरी तरह से चुदने के लिए तैयार हो चुकी थी, बार बार अपनी चूत रगड़ रही थी।

मैंने अंजलि को कहा- रुको।

मैं पूरा नंगा हो गया और अंजलि की भी मैंने पैंटी उतार दी। अंजलि बहुत मस्त लग रही थी, काफी दिनों बात अंजलि को चोदने का मौका मिल रहा था। “train sex story”

मैंने अंजलि को इशारा किया कि मेरे लंड को चूसो।

अंजलि अपने प्यारे होंठों को मेरे लंड पर रखा और चूसने लगी, मुझे बहुत मजा मिल रहा था, मैंने अंजलि को कहा- रुको, दोनों मजा लेते हैं। तुम्हारी चूत चाटे हुए बहुत दिन हो गए हैं।

हम दोनों 69 की अवस्था में हो गए।
मैं अंजलि की चूत को चाट रहा था और उसके चूत दाने को खूब अच्छे से चूस रहा था।
अंजलि तड़प जाती, उसकी उसकी चूत बहुत पानी छोड़ रही थी !

मैं जोर जोर से उसकी चूत चाट रहा था और अंजलि भी जोश में मेरे लंड को खूब चूस रही थी।

और कभी कभी अपने दांतों से काट भी लेती।

अंजलि ने कहा- हैरी, अब करो ! बर्दाश्त के बाहर हो रहा है अब।

मैंने अंजलि को कहा- कैसे चुदवाओगी?

अंजलि शरमा गई !

मैंने अंजलि से कहा- अंजलि आओ यहाँ, घोड़ी बना कर तुम्हें चोदता हूँ।

मैंने अंजलि को कहा- सीट पकड़ कर झुक जाओ।

अंजलि सीट पकड़ कर झुक गई, अंजलि की खूबसूरत चूत देख कर लग रहा था कि पिया-मिलन की आस में आज ही चूत के बाल बनाये थे, एकदम चिकनी पाव रोटी की तरह फूली हुए चूत ! ऐसे लग रहा था कि चूत कह रही हो कि आओ अब डाल दो लंड ! “train sex story”

बहुत खूबसूरत चूत लग रही थी।

मैंने देर न करते हुए अपने लंड पर थूक लगाया और अंजलि के चूत में जोर से पेल दिया।
अंजलि की थोड़ी सी आवाज की- आअहाअ और लंड पूरा अन्दर अंजलि की चूत में समां गया !
मैं अंजलि के चूत के मजे लेने लगा और ट्रेन भी रफ्तार में थी तो और मजा आ रहा था। अंजलि को अपने आप धक्के लग रहे थे।

अंजलि भी अपनी गांड हिल हिल कर लंड का अभिनंदन कर रही थी और आहा वओओह आअए सीईईईई आआहाआ कर रही थी और गांड हिला हिला कर अपनी चूत चुदवा रही थी। “train sex story”

अंजलि ने काफी दिनों से नहीं चुदवाया था तो अंजलि की चूत ने जवाब दे दिया, अंजलि सीईईइ आआहा आआ कर कर के गांड को जोर जोर से हिलाने लगी और झर गई।

अंजलि थोड़ी सुस्त हो गई झरने के बाद। मैंने लंड को चूत से निकाल लिया।

अंजलि अब सीट पर लेट गई, मैं उसका हाथ पकड़ा और कहा- अंजलि मेरे लंड की मुठ मारो।

अंजलि ने कहा- अभी मूड नहीं कर रहा, थोड़ा रुक जाओ।

पर मुझे चैन कहाँ था, मैंने फिर से अंजलि के चूचियों को दबाने और चूसने लगा। जिससे अंजलि फिर से जोश में आ गई, मैं अंजलि के ऊपर चढ़ गया और अपनी अपना लंड के बार फिर से अंजलि के चूत में दौड़ाने लगा।

अंजलि भी अब नीचे से मेरे धक्कों का जवाब अपने धक्कों से देने लगी।

मैं अंजलि को जोर जोर से चोद रहा था और अंजलि भी नीचे से अपनी कमर हिला हिला कर मजे से चुद रही थी।

इतने मजे से चुद रही थी कि कुछ देर तो वो अपनी आँखें बंद करके आअहाअ आअहाअ उह्हाआ उआअह कर रही थी और अपनी कमर जोर जोर से उचका रही थी।

चुदाई करते करते अंजलि जोर जोर से धक्के मारने को कहने लगी और अपने भी जोर जोर धक्के लगाने लगी- आअह्ह्ह्ह आआहा आआ आसीईईई आआए करते करते अपने दोनों पैर मेरी कमर को जोर से दबा दिया और कहने लगी- बस हैरी अब तो हो गया ! “train sex story”

और हांफने लगी, थोड़ी ठण्ड का समय था, फिर भी हम दोनों पसीने से सराबोर हो गए थे।

अंजलि ने कहा- तुम्हारा नहीं हुआ क्या?

मैंने कहा- बस अब थोड़ा और ! मेरे भी होने वाला ही है।

मैंने जोर जोर से अंजलि के चूत के अन्दर-बाहर लंड करने लगा और अंजलि से कहा- अंजलि, अब मैं भी झरने वाला हूँ।

मैंने कहा- अंजलि, मुझे जोर से अपने बाहों में दबा लो ! ऐसे मुझे मजा आता है, जब मेरे माल गिरता है तो।

अंजलि जानती थी यह बात !

मैंने जोर जोर से आअहाआ आअहाअ करने लगा, अंजलि जोर से मुझे अपने बाहों में दबाने लगी और मैं झर गया।

अब मैं रिलेक्स महसूस कर रहा था, अंजलि की चूत में ऐसे ही लंड डाले थोड़ी देर अंजलि के ऊपर लेटा रहा, थोड़ी देर बाद अंजलि ने टिशु पेपर से अपनी चूत को साफ़ किया और हम दोनों सो गए। “train sex story”

रात को एक बात फिर मेरे दिल किया अंजलि को चोदने का, मैंने अंजलि को जगाया और फिर से एक बार चुदाई की और सो गए।

सुबह करीब 10 बजे हम सोकर जगे, थोड़ा नाश्ता किया और एक बजे तक हम अपने स्टेशन पर पहुँच गए।

धीरज बाबू वह स्टेशन पर आये हुए थे अपनी पत्नी अंजलि को रिसीव करने ! फिर धीरज बाबू अंजलि को अपने साथ ले गए अपने मोटरसाइकिल पर।

मुझे भी कह रहे थे कि आओ आप भी बैठ जाइए, आपको घर तक छोड़ दूंगा।

मैंने कहा- नहीं, आप लोग जाओ, मैं आ जाऊँगा।

मैंने फिर टेम्पू लिया और अपने घर चला गया।

तो दोस्तों यह थी मेरी अभी हाल में हुई घटना।

कैसी लगी आपको मेरी यह कहानी?

जरूर बताइएगा !